
असली समस्या उचित मार्गदर्शन का न मिलना, संत संगति का अभाव, माता-पिता, घर, परिवार का भी विद्या, अविद्या से दूर दूर तक कोई ज्ञान नहीं है। जिसका परिणाम यह हुआ कि हम भी जो मिला वैसे बन गए खुद को देखने, जानने, समझने का कोई बोध नहीं क्योंकि जिसकी संगति में थे वो भी कभी खुद को देखते नहीं थे।
















