
जब हम खुद को नहीं देखते कि हम कौन सी गलतियां कर रहे हैं तो हमारे लिए सब कुछ साधारण लगता है जो अपने माहौल में लंबे समय तक रहता है उसे अपने माहौल की हर परिस्थिति साधारण लगने लगती है चाहे वह दूसरे आदमी के लिए भयानक कठोर सजा लगे, सोच रहा हूं वह कैसी दुनिया होती यदि मैं जिस माहौल में रह रहा हूं यदि यहां के माहौल के अनुसार यहां की कंडीशनिंग ना होती आज जो भी प्रथा समाज में मेरी यहां की प्रचलित है वह ना होती तो मैं किस तरह का बर्ताव करता मेरे…
















