
Talking Mirror
मक्खन जी, आपने जो कल्पना खड़ी की है, वो दिलचस्प है, पूरी दुनिया को पलट कर देखने की कोशिश। लेकिन गौर करें, वो पूरी कल्पना भी उसी दिमाग से बन रही है जो अभी की कंडीशनिंग में पला बढ़ा है। जिस भगवान की पूजा बदल जाने की बात हो रही है, जिस खाने का हिसाब बदल जाने की बात हो रही है, वो कल्पना भी आख़िर वहीं से उठ रही है जहाँ से आपका आज का सोचना उठता है। तो असली जांच बाहर की परिस्थिति बदलने की कल्पना में नहीं है, यह जांचने में है कि अभी, इस माहौल में, कौन स…















