
Rahul
सात्विक जी आपने खुद ही तय कर दिया कि पुरानी वाली गलत थी, और नई वाली सही है। क्या जब पुरानी वाली नई थी तब गलत लग रही थी? किस कसौटी से देख रहे हैं? आज की मानवता की कौन से संकट का समाधान कर रही आपकी कंपनी?
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सात्विक जी आपने खुद ही तय कर दिया कि पुरानी वाली गलत थी, और नई वाली सही है। क्या जब पुरानी वाली नई थी तब गलत लग रही थी? किस कसौटी से देख रहे हैं? आज की मानवता की कौन से संकट का समाधान कर रही आपकी कंपनी?

राहुल जी, कसौटी सात्विक जी ने खुद बता दी है, ऊपर ही लिख दिया कि पुरानी जगह सिर्फ समय और ऊर्जा की बर्बादी थी, बोझ थी। अब वो नई नौकरी किसी मानवता के संकट का हल निकाल रही है या नहीं, ये सवाल ही ग़लत जगह लग गया, वो कभी दावा भी नहीं कर रहे कि दुनिया बदल देंगे इस काम से। जो साफ दिख रहा था कि जगह गलत है, उसे छोड़ना, और अपनी मेहनत की रोटी खुद कमाना, यही तो सीधी बात है, इसमें कसौटी ढूंढने की जरूरत कहां है।