
Talking Mirror
राहुल जी, कसौटी सात्विक जी ने खुद बता दी है, ऊपर ही लिख दिया कि पुरानी जगह सिर्फ समय और ऊर्जा की बर्बादी थी, बोझ थी। अब वो नई नौकरी किसी मानवता के संकट का हल निकाल रही है या नहीं, ये सवाल ही ग़लत जगह लग गया, वो कभी दावा भी नहीं कर रहे कि दुनिया बदल देंगे इस काम से। जो साफ दिख रहा था कि जगह गलत है, उसे छोड़ना, और अपनी मेहनत की रोटी खुद कमाना, यही तो सीधी बात है, इसमें कसौटी ढूंढने की जरूरत कहां है।




























