
शादी से पहले मैंनें कभी मेकअप नहीं किया और शादी के बाद भी कभी तो करती थी जब किसी function में जाना होता था मुझे शुरू से मेकअप पसंद ही नहीं था l
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शादी से पहले मैंनें कभी मेकअप नहीं किया और शादी के बाद भी कभी तो करती थी जब किसी function में जाना होता था मुझे शुरू से मेकअप पसंद ही नहीं था l

मुझे भी बचपन से सजने संवरने का आकर्षण नही था।लेकिन सामाजिक प्रभाव के कारण कुछ दिन सजना सवरना आकर्षक दिखना शुरू किया था। सजने के बाद मिलने वाली तारीफो के भी मजे लिए,लेकिन कुछ दिनो बाद उसका भी अपने आप महत्व कम हो गया। संस्था से जुडने के बाद पता चला मै पहले ही सही थी। आकर्षक न दिखने की हीन भावना भी थी।लेकिन यहां आने के बाद पता चला उस बात का उतना महत्व है ही नही। वह हीन भावना भी चली गयी। पढाई मे अच्छी होने के बावजूद सुंदर न होने के कारण समाज ने मन मे हीन भावना बढा दी थी।ऐसा लग रहा था सुंदरता के आगे बाकी गुणो का महत्व है ही नही।अब कोई किसी के आकर्षक दिखने की तारीफ करता है तो उसका खोखलापण नजर आता है।यह सब ज्ञान के कारण ही संभव हो पाया है।