
Yogita
मुझे भी बचपन से सजने संवरने का आकर्षण नही था।लेकिन सामाजिक प्रभाव के कारण कुछ दिन सजना सवरना आकर्षक दिखना शुरू किया था। सजने के बाद मिलने वाली तारीफो के भी मजे लिए,लेकिन कुछ दिनो बाद उसका भी अपने आप महत्व कम हो गया। संस्था से जुडने के बाद पता चला मै पहले ही सही थी। आकर्षक न दिखने की हीन भावना भी थी।लेकिन यहां आने के बाद पता चला उस बात का उतना महत्व है ही नही। वह हीन भावना भी चली गयी। पढाई मे अच्छी होने के बावजूद सुंदर…















