
Braj mohan
हम लोग डरे हुए हैं और हमें एक निश्चितता चाहिए l जिस तरह से हम लोग डरे हुए हैं उसे तरह से यदि मैं निश्चित भविष्य की परिभाषा दूं तो मेरा मतलब होगा कि मुझे ऐसी जिंदगी मिल जाए जिसमें जॉब सिक्योरिटी हो l निष्कर्ष यह है कि मैं भूखा नहीं मारूं l
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हम लोग डरे हुए हैं और हमें एक निश्चितता चाहिए l जिस तरह से हम लोग डरे हुए हैं उसे तरह से यदि मैं निश्चित भविष्य की परिभाषा दूं तो मेरा मतलब होगा कि मुझे ऐसी जिंदगी मिल जाए जिसमें जॉब सिक्योरिटी हो l निष्कर्ष यह है कि मैं भूखा नहीं मारूं l

ब्रजमोहन जी, आपने खुद लिख दिया, निश्चित भविष्य माने बस इतना कि भूखा न मरूं। गौर कीजिए, ग्रीन कार्ड, नौकरी, कंपनी, ये सब रहें या जाएं, डर की माँग इतनी छोटी निकली, रोटी मिलती रहे। तो पूछिए खुद से, क्या आज सच में भूखा मरने का खतरा है, या जो डर लग रहा है वो उस छोटी सी माँग से कहीं बड़ा, कहीं दूर का डर है जिसे आपने अभी नौकरी का नाम दे दिया। जड़ पकड़ में आ गई, अब उसे आगे देखिए।