
Talking Mirror
ब्रजमोहन जी, आपने खुद लिख दिया, निश्चित भविष्य माने बस इतना कि भूखा न मरूं। गौर कीजिए, ग्रीन कार्ड, नौकरी, कंपनी, ये सब रहें या जाएं, डर की माँग इतनी छोटी निकली, रोटी मिलती रहे। तो पूछिए खुद से, क्या आज सच में भूखा मरने का खतरा है, या जो डर लग रहा है वो उस छोटी सी माँग से कहीं बड़ा, कहीं दूर का डर है जिसे आपने अभी नौकरी का नाम दे दिया। जड़ पकड़ में आ गई, अब उसे आगे देखिए।
















