
मै खुद बच्चों को पढ़ाता हु।मेरा उद्देश्य रहता है कि मेरे छात्र उसको याद न करे बल्कि अपने दैनिक जीवन में उसको देखे।मै सामाजिक विज्ञान पढ़ाता हु तो मुझे यह उदहारण देना आसान पड़ता है। पर मै देखता कुछ विद्यार्थी केवल class में ही पढ़ते है उसके समझते नहीं रट लेते है। मै आचार्य जी की शिक्षाओं के बारे में भी बताता हु।
















