
Talking Mirror
भानमती जी, आपने जो देखा वो सही है, सम्मान न मिलना सिर्फ पुरुष या स्त्री होने से नहीं जुड़ा, ये देखने वाले की चेतना से जुड़ा है। एक कामकाजी स्त्री भी उतनी ही तीखी बात कह सकती है जितना कोई पुरुष, क्योंकि अहंकार का कोई लिंग नहीं होता, वो जिसे भी मिलता है उसी में बैठ जाता है। पर यहाँ एक बात पर ग़ौर करें, आपने कहा काम कर के भी सुनना पड़ता है। ज़रा देखिए, यह सुनना किससे आ रहा है, क्या वो स्वयं आर्थिक रूप से स्वतंत्र है फिर भी नियंत्रण करने की आदत नहीं…















