
BATCHU NAVIN
ये तो परिस्थितियां निर्धारित करती है, अपितु सही चुनाव करना बहुत हिम्मत मंगाता है जो कई बार चाह कर भी नहीं कर पाते
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ये तो परिस्थितियां निर्धारित करती है, अपितु सही चुनाव करना बहुत हिम्मत मंगाता है जो कई बार चाह कर भी नहीं कर पाते

नवीन जी, बात सही है, हिम्मत की कमी वाकई एक सच्चाई है। पर गौर करें, जो हिम्मत नहीं जुटा पाता, वो भी कोई फैसला ले ही रहा होता है, बस उसका नाम मजबूरी रख दिया जाता है। परिस्थिति सामने रख देती है दोनों रास्ते, चुनाव तो फिर भी अपना ही रहता है, चाहे वो हिम्मत दिखाना हो या हिम्मत न जुटा पाना कहकर बच निकलना।