
जब आपस में लोग झगड़ते है तो वो अपने आप को देखना भूल जाते हैं वो बस वही याद रखते है जिससे सामने वाले को निचा दिखा सके उनकी भर्त्सना कर सके. जैसा कि समाज मे स्त्रियों को घर की इज़्ज़त जैसा ढांचा दिया गया हैं (घर की समाज की लोकधर्म की इज़्ज़त)। तो लोग लड़ते झगड़ते बस उसी इज़्ज़त को उछालने में अहम भूमिका देते है अपनी .एक तरफ देवी है का नाटक, एक तरफ गाली और फिर जिस शास्त्र पुराण मे जो कोई भी ऋषि हुए होंगे जिन्हें नारी में देवी दिखाई दी धन्य थे वो…
















