
किसी भी जीव के दर्द को सच में देख पाना हमारी संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करता है, क्योंकि जब हम दूसरे जीव की पीड़ा को महसूस करने लगते हैं, तो अपनी सुविधा के लिए उसे अनदेखा करना उतना आसान नहीं रहता। पर सिर्फ उसे अपनी आवश्यकता की श्रेणी मे रखते है तो ये आसान रहता है इसलिए “कोई भी जीव—चाहे इंसान हो या मछली” उसका शोषण करते वक्त वह सिर्फ़ उपभोग की वस्तु नजर आता है 🕸 और दर्द को देखना खुद के विवेक पर प्रshn खड़े karta है👀
















