
कोई चीज हमे सत्य का ज्ञान करने में सहायता कर रही है क्या कोई हमारी चेतन को ऊपर उठने मैं मदद कर रही तो वो की ठीक है हम उसे स्वीकार करते है जैसे शरीर ये मेरा शरीर है ये मान्यता ,भ्रम आदि। और पता भी नहीं कैसे हम इस बात से बहुत गहरे जुड़ गए है लेकिन शरीर का इस्तमाल मुक्ति के लिए हो रहा है या बंधन के लिए। ऐसे ही अनेक चीजें है जिनको हम पकड़े रहते हैं लेकिन हमें यह ईमानदार से खुद से पूछना पड़ेगा कि यह वास्तव मैं मुझे ऊंचाई दे रहे ही या सिर्फ मेरी पहचा…
















