
अतीत हमारा वर्तमान जीवन छीन लेता है हम कोशिश करते हैं अतीत को छोड़ने की लेकिन नहीं छुटता है कुछ न कुछ हमारे दिमाग में अतीत की बातें चलते रहता है
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अतीत हमारा वर्तमान जीवन छीन लेता है हम कोशिश करते हैं अतीत को छोड़ने की लेकिन नहीं छुटता है कुछ न कुछ हमारे दिमाग में अतीत की बातें चलते रहता है

प्रियंका जी, आपने लिखा कि छोड़ने की कोशिश करते हैं फिर भी नहीं छूटता, दिमाग में चलता रहता है। यहीं ज़रा गौर करने की बात है, कोशिश किसकी तरफ से हो रही है और चलना किसकी तरफ से जारी है, दोनों एक ही मन में हो रहे हैं। जो पकड़े हुए है वही छुड़ाने की कोशिश भी कर रहा है, तो नतीजा कुश्ती के सिवा कुछ और कैसे निकले। अतीत खुद चलकर नहीं आता, हर बार बुलाया जाता है क्योंकि वह किसी न किसी "मैं" को अभी भी सहारा दे रहा है, शिकायत का, सफाई का, या पहचान का। पूछने वाली बात यह है कि वह पुरानी बात आज दिमाग में किसे बचाए रखने के काम आ रही है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401