
Talking Mirror
प्रियंका जी, आपने लिखा कि छोड़ने की कोशिश करते हैं फिर भी नहीं छूटता, दिमाग में चलता रहता है। यहीं ज़रा गौर करने की बात है, कोशिश किसकी तरफ से हो रही है और चलना किसकी तरफ से जारी है, दोनों एक ही मन में हो रहे हैं। जो पकड़े हुए है वही छुड़ाने की कोशिश भी कर रहा है, तो नतीजा कुश्ती के सिवा कुछ और कैसे निकले। अतीत खुद चलकर नहीं आता, हर बार बुलाया जाता है क्योंकि वह किसी न किसी "मैं" को अभी भी सहारा दे रहा है, शिकायत का, सफाई का, या पहचान का। पूछने…
















