
नहीं , जब तक वो अपने आप को एक स्त्री की देह ही समझती है । तब तक तो वो कुछ भी ऐसा जो वो कर तो सकती है । पर ये जो हमारे अंदर बचपन से ही एक स्त्री भाव ढाल दिया गया है न । ये बार बार उछाल उछेल के आता है । उस स्त्री भाव जिस में शादी , पढ़ाई , ओर बहुत सारी बातें आती हे । ओर हां वो चुनाव कर भी सकती है । जब वो अपनी खुद की जिम्मेदारी खुद ले । किसी ओर के कंधों पर बंदूक न चलाए । हमे हमेशा परिनिर्भरता ही डर…
















