
मुझे जो भी लगता है ऐसा लगता है वो लगना मेरा नहीं किसी और का ही मेरा एक एक शब्द एक एक विचार दूसरों का है फिर भी जिसपे मुझे नाज है वो आचार्य जी का सानिध्य मेरा आचार्य जी की संस्था से जुड़ा होना । मैं इसे आचार्य जी की संस्था बोल रहा हूँ जबकि आचार्य जी ही बोलते है इसे जब तक तुम अपना काम नहीं मानोगे समझ ही नहीं आएगा कम कितना गंभीर है और कम की गंभीरता समझे बिना जुड़ाव नहीं यह जुड़ना जुड़ना नहीं है सही जुड़ाव तो तब होगा जब तुम इसे मेरा नहीं अपना काम म…





























