
ashok
अधूरी जानकारी लेकर मैं कई शहरों और जगहों पर गया हूं बस उसकी कुछ छवियों के आधार पर लेकिन वास्तविकता और उस जगह की उपयोगिता वहां कुछ दिन बिताने के बाद पता चली। मैं बस एक ही दृष्टिकोण से जगहों और परिस्थिति को देखता हूं लेकिन जब उससे सामना होता है अलग नजरिए, दृष्टिकोण और तथ्यों से तब भ्रम टूट जाता है कि हमें कुछ मालूम था।
















