
अजीत लगता हैं पहले मुझे भी क्रांतिकारी विचार आते थे,लेकिन अब लग है समाज द्वारा भरा गया हवा था । इससे यह भी पता चलता है कि क्रांतिकारी बहुत बहुत सताए गए थे या और वह चाहते थे कि मरेंगे या मारेंगे और समाज ,जीवन के प्रति पूर्णतः निराश हो गए थे । आज भी क्रांतिकारी उत्तेजना आता लेकिन मरने और मारने से भय लगता है । ऐसा लगता हैं एक जन्म मिला है क्या किसी को मारना और क्यों किसी से बैर रखना । लेकिन मेरे ही भीतर यह क्या है जो मुझे हर पल बेचैन करता है ।लगता…
















