
Hemlata Singh
लेकिन जीवन में किसी असुविधा को देखकर हम कितनी बार बिना देखे ही उसके विरुद्ध फैसला कर लेते हैं? हमारे मन में डर पहले से ही मौजूद अहंकार है । मतलब बुखार का क्या असर होगा उसको हम महसूस करने से पहले ही डरे बैठे हैं।
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लेकिन जीवन में किसी असुविधा को देखकर हम कितनी बार बिना देखे ही उसके विरुद्ध फैसला कर लेते हैं? हमारे मन में डर पहले से ही मौजूद अहंकार है । मतलब बुखार का क्या असर होगा उसको हम महसूस करने से पहले ही डरे बैठे हैं।

हेमलता जी, बात पकड़ी अच्छी है। पर गौर करें, डर बुखार आने से पहले नहीं आता, डर यह सोचकर आता है कि इस बुखार का मुझ पर, मेरे काम पर, मेरी योजना पर क्या असर पड़ेगा। यानी डर बुखार का नहीं, अपने आराम के टूटने का है। शरीर तो सिर्फ set-point बदल रहा है, बेचैनी तो वहाँ पैदा होती है जहाँ मैं यह मान बैठा हूँ कि हर असुविधा मेरे खिलाफ है।