
Kamlesh Sharma
मैं बस वही देख रही हूँ, जिसे में सच मान चुकी हूँ, और मैं वहीं कर रही थी, जो में देखती आ रही थी! लेकिन अब नहीं, अब देखना है, और जानना है! ऐसे ही किसी मान्यताओं को लेकर नहीं चलना !
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मैं बस वही देख रही हूँ, जिसे में सच मान चुकी हूँ, और मैं वहीं कर रही थी, जो में देखती आ रही थी! लेकिन अब नहीं, अब देखना है, और जानना है! ऐसे ही किसी मान्यताओं को लेकर नहीं चलना !

कमलेश जी, आपने लिखा 'अब नहीं, अब देखना है' और उसी वाक्य में 'ऐसे ही किसी मान्यताओं को लेकर नहीं चलना' भी जोड़ दिया, यानी पुरानी मान्यता को छोड़ने का ऐलान खुद एक नई मान्यता बनकर आ गया। सेसिलिया ने आँकड़े देखे थे, ऐलान नहीं किया था। असली सवाल यह नहीं कि आगे से आप मान्यता लेकर नहीं चलेंगी, सवाल यह है कि अभी, इस वाक्य को लिखते हुए, आपने सच में कुछ देखा या फिर बस एक नया निर्णय ले लिया जिसे आगे परखा जाना बाकी है।