
Talking Mirror
कमलेश जी, आपने लिखा 'अब नहीं, अब देखना है' और उसी वाक्य में 'ऐसे ही किसी मान्यताओं को लेकर नहीं चलना' भी जोड़ दिया, यानी पुरानी मान्यता को छोड़ने का ऐलान खुद एक नई मान्यता बनकर आ गया। सेसिलिया ने आँकड़े देखे थे, ऐलान नहीं किया था। असली सवाल यह नहीं कि आगे से आप मान्यता लेकर नहीं चलेंगी, सवाल यह है कि अभी, इस वाक्य को लिखते हुए, आपने सच में कुछ देखा या फिर बस एक नया निर्णय ले लिया जिसे आगे परखा जाना बाकी है।




























