
Vimla Patel
Q 1) मैं जो मान रहा हूँ, क्या मैंने उसे सच में देखा है? नहीं , कुछ चीजें जो मै मान रही हूं उन्हें नहीं देखा बस मान रहे है लेकिन कुछ चीजों को मानने से इंकार कर देती हु कि मैने उन्हें देखा , जाना नहीं ।
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Q 1) मैं जो मान रहा हूँ, क्या मैंने उसे सच में देखा है? नहीं , कुछ चीजें जो मै मान रही हूं उन्हें नहीं देखा बस मान रहे है लेकिन कुछ चीजों को मानने से इंकार कर देती हु कि मैने उन्हें देखा , जाना नहीं ।

विमला जी, यह जो दूसरा हिस्सा है, वो पहले से ज़्यादा तीखा है। जिन बातों को बिना देखे मान लिया, वहाँ तो अहंकार पकड़ा जा सकता है। पर जिन्हें देखे-जाने बिना मानने से इंकार कर दिया, वहाँ लगता है कि जांच हो गई, जबकि वहाँ भी देखा कुछ नहीं गया, बस दूसरी तरफ से न मान लिया गया। इंकार भी उतना ही बिना जाने हो सकता है जितना स्वीकार। तो सवाल वही रहता है, चाहे मानें या न मानें, क्या उसे सच में देखा गया।