
यथार्थ। इसे देखने के लिए भी पारदर्शिता जरूरी है वो गीता से जुड़ कर ही आ सकती है । अभी तो मेरी भी जिंदगी उस भूखे कुत्तों जैसी ही चल रही और मैं दौड़ रहा हु । पर जैसा आचार्य से बताया देखना से कम नहीं चलेगा उसे भी मैं अपना भोग बना लूंगा ( बना भी लिया है )। असल देखना जानना उसे जानो जन विषय से गुजर जाओ, अभी तो मैं हर दिन देख ही रहा हु बस । जो कीमत चाहिए लगाव उसे जुड़ा है, हिम्मत इतने सालों से की नहीं उसका डर , और डर भी झूठ, जो है नहीं उसके जाने क…
















