
मैंने यह पोस्ट पढ़ने के बाद मूवी देखी और पोस्ट नहीं पड़ी पुरी की मूवी की स्टोरी रिवील ना हो जाए पर फिल्म ना समझ आने के कारण बीच में ही मुझे यह पोस्ट पढ़नी पड़ी और तब समझ में आया कि जिस निष्कर्ष को मैं इस मूवी में ढूंढ रही हूंँ वो इस पोस्ट में भी नहीं है और यही इसकी खास बात है। बस खुद को देख लेना बिना अभियोजन, वकील और जज के। और मैंने यही समझा कि मैं जेल में नहीं हूंँ पर मैं आजाद भी नहीं हूंँ।
















