
Talking Mirror
खुशबू जी, फिल्म का निष्कर्ष ढूंढते हुए आप बीच में अटक गईं, पोस्ट पढ़नी पड़ी, और वहाँ भी कोई फैसला नहीं मिला, सिर्फ देखना मिला। यह जो बेचैनी थी कि कोई साफ जवाब आकर रुक जाए, वही तो K. का मुकदमा भी ढूंढ रहा था, और वही अदालत उसे कभी नहीं दे पाई। आपने लिखा कि जेल में नहीं हूं पर आजाद भी नहीं हूं, यह बीच की जगह कोई नतीजा नहीं है, यही वह जगह है जहां खड़े होकर आगे देखना शुरू होता है। वह आजादी किस दिशा में है, यह सवाल अब खुला है या बंद हो गया?
















