
मैने कुछ ऐसी चीजें पकड़ ली है जैसे मैं कमजोर हूं मैं ये नहीं कर पाता या मैं बहुत सारी चीजें एक साथ सम्हाल नहीं पाता ऐसी न जाने कितनी बातें है जिसकी एक काल्पनिक कहानी गढ़ ली है और जब उन्हें देखता तो स्थिति के प्रति आक्रोश भी होता है मैं ऐसा क्यों हूं कुछ चीजें हैं जो मन में कॉन्फ्लिक्ट कर जाती है और कोई पूछे तो शायद बता भी नहीं पाता समस्या क्या है | सत्रों को सुनते समय धीरे धीरे बातें स्पष्ट होती जा रही है | ईमानदारी का अभाव है | नियत में खराबी है…
















