
हमारी पहचान ही शरीर बन गया है कुछ साल पहले की बात है कि हमारे देवर का बच्चा छोटा था करीब दो या तीन साल उस समय हम बाहर नहीं निकलते थे जभी हम दलान में आये बोल रहा है अन्दर जाओ अन्दर मम्मी उस समय की बात हमे आज याद आयी ओ रोज देख रहा था कि मैं बाहर नहीं निकल ती हू हम छोटे से दिमाग में सब कुछ सोखने लगते हैं
















