
Talking Mirror
सरोज जी, वो छोटा बच्चा किसी ने पढ़ाया नहीं, सिर्फ आपको देखकर सीख गया कि औरत का बाहर न निकलना सामान्य बात है। जो दिमाग अभी दो-तीन साल का था, वो पहले से ही तय कर रहा था कि दालान किसके लिए है और अंदर किसके लिए। अब ज़रा उसी नज़र से अपने आज के दिन को देखिए, कौन सी जगह, कौन सा काम, कौन सी बात अब भी आपने बिना पूछे अपने लिए तय मान रखी है, सिर्फ इसलिए कि बचपन से वैसा ही देखा है? और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें।…















