✍🏻 पोस्ट 1 | 24 सितंबर '26
💭 विषय — इंडियन करंट अफेयर्स──────────
🚻 स्कूल में पढ़ने वाले 5 करोड़ बच्चों के पास आज भी स्वच्छता की सुविधा नहीं!
📋 WHO और UNICEF की नई रिपोर्ट ‘प्रोग्रेस ऑन ड्रिंकिंग वॉटर, सैनिटेशन एंड हाइजीन इन स्कूल्स 2015-2025’ भारत की एक बड़ी चुनौती सामने रखती है।
📊 भारत की स्थिति, 2025
🔹 करीब 5 करोड़ भारतीय बच्चों के स्कूल में स्वच्छता सेवा उपलब्ध नहीं थी।
🔹 दुनिया में ऐसे बच्चों की कुल संख्या 24.4 करोड़ थी, यानी ह…
यह बात 100 प्रतिशत सही है| अभी हाली में हमने हर स्कूल की भौतिक सुविधा की जाँच की ,99% सभी स्कूलों में शौचालय की उपलब्धी अच्छी नही थी |लेकिन वहाँ के प्रिन्सिपल सच्चाई बता नही रहे थे| क्योंकी उनके स्कूल को कम ग्रेड मिल जायेगी|
अहंकार खुद को बचाने के लिए किसी भी हद तक गिर सकता है|
Surya kant Biswas
How Parental pressure affects the child: 🚸🚸🚸
This is a real story I have heard during discussions at my office.
I have a senior at my office, let's name him Ajay sir. This incident is shared by Ajay sir himself in office.
When Ajay sir's boy once got admission in one of the most prestigious schools in the town in class 7th.The admission selection test is very tough. Only 120 students were selected out of 1200. The boy got selected, so we can say he is a brilliant student indeed.
In that particular prestigious school 🏫, a new subject is added: 'SANSKRIT'.
The boy is reading sanskrit for the very first time in his life. One day the sanskrit teacher asked some questions to the boy, but he was unable to answer those, this the furious master made the boy stand on the bench and in front of the whole classroom he scolded the boy and also threatened to cancel his admission in that school entirely.
Now that threat did something internally to the boy. He very soon developed a massive headache. His head would pain a lot day after day.
Ajay sir had tension, what is a tumor grew in the brain of the little boy??!!
Ajay Sir took the boy to great hospitals in Valore from West Bengal. There, psychologists discovered the cause and gave a medicine 💊, a tablet.
But where was the problem really?
Why the boy couldn't share the incident to the parents?
Today I asked Ajay sir if admission in that particular prestigious school was really that necessary. If that angry teacher really removed the boy fromthat school, weren't there any other schools to get admitted?
To that, Ajay sir replied with a lopsided smile, that the selection process was indeed tough, and the school was prestigious too, that proved the child to be 'golden', that in turn feeds the identity of Ajay sir as successful, ideal parent.
So the real problem was elsewhere, it's in the parents. Offcourse the sanskrit teacher's furiosity was not useless and harming for any student. But the real problem was the parents, and their craving for prestige and 'ideal' identity.
Pooja
सिर्फ सरकारी स्कूल ही नहीं सरकारी हॉस्पिटल का भी यही हाल है मेरे यहां का सरकारी हास्पिटल जो कि एक बहुत बड़े एरिया को कवर करता है लेकिन वहां सिर्फ दो Female Dr है
PUJA KUMARI
मैं जहांके रहने रहने वाली हूं वहां का स्कूल का दरवाजा तो darvaja Sahi to hai hi nahin aur toilet Kitna sahi rhega
Anoop Kumar
college ''Atarra PG College Atarra '' यहां पर कई PG कोर्स संचालित हैं लेकिन यहां की स्वच्छता व्यवस्था एकदम ही खराब है। एक टॉयलेट तक नहीं है। खंडार जैसा कॉलेज है। स्वच्छता की बात तो कोई करे ही नहीं। इतना गंदा कि क्या कहना ,
बबली पाल
मैं भी सरकारी स्कूल से पढ़ाई की है और सरकारी स्कूलों की शौचालय की हालत तो खराब होती ही होती है
वही हाल वहां की शिक्षा का भी होता है और जो भी शिक्षक पढ़ाते हैंपढ़ते हैं कई कई शिक्षक तो ऐसे भी हैं जो कि बच्चों को किसी एक की कॉपी बनवा देंगे प्रश्न और आंसर बस इस कॉपी को पर क्लास ने उसी से देख कर सबको लिखवा देंगे यह लिख लीजिए और समझना भी नहीं है और बताना भी नहीं है तो इस स्थिति में बच्चे क्या ही सीख पाते हैं बस लिख कर रख लिया उनको समझ में कुछ आ नहीं रहा और ऐसा मेरे साथ भी हुआ मैंने भी देखा मैं भी सरकारी स्कूल से पढ़ी हूं
और किसी बच्चे ने हिम्मत करके अगर पूछ भी लिया तो उसके दो-चार चांटा लगा दिए तो दोबारा वह पूछेगा ही नही
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Nirmal Kumar
मैं आज भी यही देख रहा हूँ। गाँव के विद्यालयों के शौचालय में ताला लगी होती हैं, सिर्फ शिक्षक इस्तमाल करते हैं, गांव के बहुत बच्चे साधारण सुविधा भी नहीं जाना है और ना ही अपनी साधारण जिम्मेदारी।
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Pooja kumari
sahi baat h.....
Sonam
मैं भी सरकारी स्कूल में पढ़ी हूं जैसा हाल वहां के शौचालय का है वैसा ही हाल वहां की पढ़ाई का भी है न जाने कितने ही युवा हैं जो सरकारी स्कूल में पढे हैं और अपना कुछ भी नहीं करते हैं वे आत्मनिर्भर नहीं हैं
Surendra Dhurve
the Schools have same conditions there is lack of Self aware ness, It is very common in roads sides and other public places, people don't care about garbage,they throw by themselves, don't Care about its impact.
we can't blame authorities for every individual action but need to be careful.
therefore, self awareness becomes inevitable.
Harsh Kumar
जहाँ तक मैने अपनी शिक्षा के दौरान देखा हमारे साथ के विद्यार्थी स्वयं नुकसान पहुंचाते थे।
Bhawna Bhartola
मैने कक्षा एक से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई सरकारी स्कूल में की है जिनमें से कोई भी स्कूल में शौचालय नहीं था ना पीने के पानी की सुविधा जिस तरह शौचालय का हाल था वैसा ही हाल पढ़ाई का।
neelam Digrase
जब सरकारी स्कूल में मैंने पढ़ाई की थी तब वह पे शौचालय की सुविधा थी । इसलिए उस समय इतना ध्यान नहीं गया । पर जब मैने अतिथि शिक्षक के तौर पर सरकारी स्कूल में पढ़ाया था जो कि ग्रामीण क्षेत्र में,तब वह शौचालय होते थे लेकिन उनकी साफ सफाई पर ध्यान उतना नहीं दिया जाता था । उसके लिए मुझे भी शौचालय का उपयोग न करते हुए बाहर भी जाना पड़ा है । इस बात पर ध्यान जाने के बाद भी वैसा ही होता है इसलिए ये जाने दिया सामान्य लगी , पर कभी कभी सफाई भी करवाई गई। पर जैसा कि हम सिर्फ ऊपर बाहर बाहर ही देखते है सब ठीक है साफ है यही दिखता है लेकिन जब भीतर देखो तब पता चलता है कुछ तो गड़बड़ है ।
Ashwani Kumar
अहंकार उसी चीज को प्राथमिकता देता है जिसको वह दूसरों को उपलब्धि की तरह दिखा दे।
Neema Kunwar devra
मैने भी सरकारी स्कूल में पढ़ाई की स्कूल में कभी शौचालय जाती ही नहीं थी क्योंकि इतनी हालत खराब होती थी।
Kamlesh Sharma
मेरे आस -पास रास्ते तो सही है, सरकारी स्कूल की हालत यहाँ पर भी भूतिया ही है, प्राइवेट पुराने स्कूल बन्द होने की कगार पर है, लेकिन और नई जगहों पर नये प्राइवेट स्कूल खोले जा रहे है। अब नये स्कूल बनाये जा रहे है, तो जाहिर है, सारी फैसिलिटी है लेकिन उनकी फीस आसमान छुने वाली है!
एक बार मैने सुना था , या कहीं पढ़ा था अच्छे से याद नहीं, वो बात ऐसे थी कि कहीं कोई स्लम एरिया या फिर झुग्गी -बस्ती में रहने वालों के लिए सरकार ने नये मकान या फ्लैट बना कर दिए थे, अब सरकार ने तो साफ और नये बनाकर दिये थे, वहाँ रहने वाले लोगों ने उस नई जगह पर धीरे- धीरे गंदगी करनी शुरू कर दिया, जैसे कई लोग गुटखा खाते है ,बीड़ी पीते हैं, और जैसे ठण्डा पिया या फिर कोई पैकेट का सामान खाया जैसे कुरकुरे आदि!
डस्टिंग डब्बा होने के बावजूद उसका इस्तेमाल नही करते, अब ऐसे लोगों के बारे में क्या जहा जाए!
Surabhi kumari
मैं भी सरकारी स्कूल से पढ़ी हु वहाँ पर तो विशेषज्ञ टीचर तो थे है नहीं पर सबसे बड़ी बात वहां पर छात्रों के लिए शौचालय भी नहीं था । हमलोगो को खुले में जाना पड़ता था और स्थितियां एकदम प्रतिकूल होती थी तो क्लास भी मिस करना पड़ता था पर इसके लिए न हमलोगे ने सवाल उठाया और न पैरेंट्स के द्वारा सवाल उठाया जाता,बस इतना ही लोगों का स्कूल से मतलब था कि बच्चे की 75% उपस्थिति हो ताकि छात्रवृत्ति और पोशाक की सुविधा मिलती रहे।
कोमल Mishra
I studied in government school so this problem I faced it .
Brajesh Rajput
हर सरकारी स्कूल का यही हाल है टॉयलट क्लास रूम तभी साफ होते है जब बड़े अधिकारी आते है नही तो साफ भी नही होते
Archana Baghel
जब शौचालय,स्कूल और सार्वजनिक जगहों साथ ही सरकारी कार्यालयों में देखती हूं तो सबसे पहले यही आता कि लोग स्वयं जागरूक नहीं है, लोग अपने जिम्मेदारी से बचने के लिए सरकार पर डालते हैं फिर और गंदगी मचाते हैं। सरकार का ही सारा काम नहीं है सफाई का। सफाई तो अपने से आती है।
जो अंदर से गंदा होता है वह बाहर भी गंदगी फैलाता है। लोगो की सोच "यह संपत्ति मेरी थोड़ी न है यह तो सरकार की है तो फिर मुझे क्या लेना देना" भले ही इसके कारण बीमार पड़के कीमत चुका लेगा पर सफाई अहंकार बड़ा है।
RADHA RAY
नमस्ते आचार्य जी हमें परिवार समाज और रिश्तेदारों द्वारा यही सिखाया, समझाया और दिखाया गया है कि शिक्षा मतलब एक उंचा पद, अधिक से अधिक डिग्री अधिक पैसे वाला नौकरी स्कूल कि क्या जरूरत, व्यवस्था है उस पर किसी कि नजर नहीं जाती हम अपने जिम्मेदारी से बचने के लिए सरकार को दोषी ठहराते हैं हां ये बात सही है कि उसको वोट देते हैं तो जिम्मेदारी भी सबसे ज्यादा उसी का होता है पर हम वोट भी तो किस चीज पर देते हैं और हमारी मांगे क्या होती है और चंद पैसों और चीजों के लिए बिक जाते हैं तो बिकी हुई चीज कि क्या किमत रानी यानी गुलामों कि क्या जरूरत और इज्जत होती है वो भली भांति परिचित हैं हम जैसे होते हैं वैसे ही सरकारें,या और भी चीजें चुनते हैं अहंकार हमेशा अपनी बचाव के लिए दुसरे को दोषी मानता आया है धन्यवाद
Reeta Gautam
हम इन बातों को अपनी बहस का मुद्दा ही नहीं बनने देते क्योंकि लोकधर्म ने हमें इतना असंवेदनशील बना दिया है कि साफ सफाई एक विशेष वर्ग की जिम्मेदारी है हम तो सिर्फ अपने घर की गंदगी बाहर फेंक देंगे भले ही वातावरण गंदा हो।
हमें तो सफाई पसंद है लेकिन सिर्फ अपने घर की उसपे भी हम सफाई पसंद लोग हैंऔर जो सफाई कर रहा है वो गंदा है ।
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vaishali bharti
मैं एकदम रिमोट एरिया में रहती थी तो वहां आदिवासी लड़की ओकी हॉस्टल रहती हे, तो कभी कभी वह जा के उनके साथ मिलके खाना खाते, बात करते फिर उनको हाइजीन के बारे में समझते, उनको पेड इस्तमाल करनेके लिए समझाते थे l सरकारकी तरफसे ped आते भी थे लेकिन लड़कियां उसे use करना नहीं चाहती थी, बोलती हे हमारेमे ऐसा रिवाज नहीं हे। फैशन सारी करनी होती हे, लेकिन इसमें रिवाज आ जाता हे। मुझे ये समाज नहीं आता था के सफाई में रिवाज कहा से आया?
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Arti Gupta
👀 पर क्या उसका शौचालय देखा? और अगर पहली प्रतिक्रिया "सरकार क्या कर रही है" थी, तो देखिए कि यह सवाल आपको कितनी सुविधा से बाहर खड़ा कर देता है।
आप गवाह बन जाते हैं, और यह गवाह होना भी एक पहचान है: "मैं संवेदनशील हूँ, मैंने ख़बर पढ़ी।"
🥺कोई गवाही ही नहीं मैने और मेरे साथ के सभी बच्चों ने ये सब झेला हुआ है क्योंकि हमारे गांव के स्कूलों मेवाज भी कुछ खास परिवर्तन नहीं हुआ ।
आज भी प्राइमरी स्कूल 🏚️🏚️🏚️ ऐसे है जिनकी इमारत शहर के लोग देख ले तो बोले ये तो को हॉरर 🏚️🏚️ मूवी शूट करने की जग है । अगर गांव में 10 स्कूल है और 10 के 10 सरकारी है फिर चाहे वो 12th tk hi kyun न हो वो सारे ऐसे है गिरी हुई छते, गंदे और टूटे washrom, जिसमें पानी की भी सुविधा नहीं।और पीने के पानी के लिए आज भी हैंडपंप जिसका पानी इतना बदबूदार 🙊😤🤢 कि जब प्यास से लगे कि पानी न मिला तो मर जाएंगे तो हम सब नाक बंद करके पानी पीते थे ।🫠🫠🫠 घर से पानी की बोतल साथ ले जाने लगे हम सब ।
लेकिन कोई खास फायदा नहीं गांव की किनारे चमड़ा फैक्टरी होने 🌆🏙️🌇 पूरे गांव का पानी दूषित और हवा भी दूषित है । घर में वाटर प्योरिफायर लगाकर पानी तो साफ मिलने लगा लेकिन हवा की क्वालिटी दिन ब दिन उससे ज्यादा बुरी होती जा रही ।🤢🤢
रही बात प्राइवेट स्कूल की तो जिसके घरो की इंकम अच्छी है वहीं वहां पढ़ सकते है । पानी साफ मिल सकता है , बैठने की जगह मिल सकती है, लेकिन हवा तो वही रहेगी 😤😤वो तो नहीं बदल सकती।🥺🥺
अगर मान लीजिए कुछ km के दायरे में 10 स्कूल है तो उनमें से बस 3 ही स्कूल ऐसे होंगी जो थोड़े ठीक हालत में होंगे 🏚️🏚️ । बाकी की स्कूल की अपेक्षा । वो वही जो कि प्राइवेट स्कूल है सरकारी नहीं ।
हम लोगों न 10th कक्षा tk प्राइवेट पढ़ा क्योंकि उसके आगे की पढ़ाई के लिए गांव में प्राइवेट स्कूल नहीं था 🥲🥲। इसलिए आगे की पढ़ाई सरकारी कॉलेज से हुई ।🫠🫠
अब मैं उसकी भी बात बताती हूं , उसमें भी ऐसा था कि जितने दूर तक स्कूल की जगह का घेराव था वहां की सड़क तो ठीक थी वो थोड़ी बहुत ज्यादा नहीं । अगर ज्यादा बारिश हो जाए तो सड़को पर पानी भरा जाता जिसे पहने में 2 दिन लगते और बाकी का बचा 3 से 4 दिन में सूखता है। बारिश में हम लोग घुटनों तक पानी में उतरकर स्कूल पहुंचते थे ।
आज भि कोई खास बदलाव नहीं हुआ । स्कूल के अंदर की हालत ऐसे थे कि कक्षाओं में बंदर🐵🐵🐵 टहलते जब हम लोग 🙏🙏प्रेयर के लिए जाते तो डरते की कहीं बंदर खान खोजने के चक्कर में किताबें न फाड़ दे📚📚 , होता भी था कई बार ऐसा । जब वो बैग न खोल पाते तो बैग 🎒🎒उठा ले जाते और सारा बैग ,किताबें 📚📖अब फाड़ देते । 😑😑
पीने का पानी उतना गंदा, टायलेट जाना हो तो वॉशरूम इतना ही गंदा न कोई पानी की सुविधा नहीं । ❌❌इसलिए हम लोगों ने फिर तय किया कि अब कोई वॉशरूम नहीं जाएगा 🚽जिसे आए वो छुट्टी तक इंतजार करता और घर जाए ।🏘️🏘️
ऐसा करने से हम सभी लड़कियों की तबियत बढ़ने🏥 लगी तो पता चला toilet रोकने की वजह से तब सारी लड़कियां स्कूल के बाहर जंगल जाती थी । 🌲🌳🌴🌵
एक दिन ऐसा आया कि सभी स्टूडेंट्स ने पता लगा लिया कि गवर्नमेंट पैसा 💵💸💴💶💷💰 भेजती है ये लोग काम नहीं करते पैसा अपने पास रखते है ।
👥👥👥हम लोगों ने फिर भी अपने एक अर्थशास्त्र के शिक्षक 👤की मदद से एक शिकायत📝📝✏️ पत्र लिकर प्रबंधक को भेजा ।लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ ।😿 वहां से जवाब आया कि दुबारा ऐसा हुआ तो स्कूल की तरफ से कारवाही होगी । 💀👹कुछ टाइम बाद फिर से हम लोगों ने बोला तो हम सबके नाम लिखे गए और सभी को 11th क्लास के एग्जाम में फेल करने की 😲😲धमकी दी गई। कि तुम सबका साल बर्बाद कर देंगे। 🫵🫵😡🤬
अब पीछे हट गए फिर 12th क्लास में मुश्किल से 15 से 20 स्टूडेंट्स ही सामने आए स्कूल व्यवस्था🏘️🏘️ सुधरने के लिए । 🙂🙂🙂उन सभी में मै भी थी , आखिर अंजाम वही हुआ ।🫠🫠हम सबको प्रैक्टिकल के नम्बर काट दिया । 📋📋📝📉वो शुक्र था कि बाकी के पेपर बोर्ड एग्जाम थे, 📋वरना वो लोग फेल कर देते । तभी 12th क्लास में हम लोगों के नंबर 75 % ही आए थे ।
बस यही थी हमारे स्कूल के टाइम की स्थिति 🥲🥲आज भी उसमें कुछ ज्यादा परिवर्तन नहीं है। 🫠🫠 जो बच्चे जाते है उनसे पूछने पर पता चला कि अब वहां ज्यादा बच्चे नहीं पढ़ते 🙇🙇। जितने हम लोगों के टाइम थे, उससे भी अब 40 % ही बचे है ।
🫠🫠
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Bharti Parmar
सरकारी स्कूल में पढ़ी हु इस बात से भली भांति परिचित हु ।
Rahul Singh
It is the main problem of ourself that we only see that thing whose important in society and create a value and we avoid to see our child facilities his basic need and neccesities of life that always necessary thing but we still lack to see those thing
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Avadhesh Kumar
very important text for everyone
Chhotu Kumar jha
सिमित्ता हीं दुख है, इससे बाहर निकलिए तो पता चले क्या चल रहा है।🙏
MAYURI KUMARI
मैं खुद एक सरकारी स्कूल से हु तो मैने से अब बहुत नज़दीक से देखी हु और में तो पूरा दिन टॉयलेट जाती ही नहीं थी जब घर आती थी तब ही जाती थी और जब मेरा पीरियड आता था तो स्कूल जाती ही नहीं थी तभी तो लगता था कि सारी जिम्मेदारी सरकार की ही हे लेकिन अब पता चलता हे जैसे हां वैसे हमारा सरकार होता हे। ओर किसी को कोई मतलब नहीं होता था। लेकिन में जब कॉलेज गई तो वह पे भी वॉशरूम तो था लेकिन साफ नहीं था वो महिला कॉलेज था फिरभी तो कुछ लड़ियों ने मिल के क्लास के ही प्रिंसपल को लेटर लिखे तो जाके काम हुआ ये बात हे ग्रेजुएशन की लेकिन पोस्ट ग्रेजुएशन में भी यही हाल था तो ये शरीफ स्कूल की ही बात नहीं हे।
kavita kumawat
🌿 मैने अपनी क्लास 9 से 12 तक की पढ़ाई अपने गांव की गवर्मेंट स्कूल से ही की है वहा इन सारी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था , टीचरों के लिए अलग से टॉयलेट होता था उन्हें इतनी दिक्कत नहीं होती थी , पर बच्चों को उसमें भी गर्ल्स को बहुत परेशानी होती थी खासकर पीरियड्स में पर इन बातों पर स्कूल के प्रशासन का कोई ध्यान नहीं होता था । उन्हें बस अपनी सुविधा और अपनी सैलरी से मतलब था । बच्चे ऐसे ही प्यासे रहते थे , स्कूल का पानी पीने लायक नहीं था । पर कभी बच्चों ने भी इस व्यवस्था के बारे में नहीं बोला क्योंकि उन्हें भी यही लगता था कि सरकारी स्कूलों में ऐसा ही होता है यही अगर प्राइवेट स्कूल की बात होती तो उसे लेकर हम इतना गैरजिम्मेदार नहीं रहते ।
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✍🏻 पोस्ट 1 | 24 सितंबर '26 💭 विषय — इंडियन करंट अफेयर्स ────────── 🚻 स्कूल में पढ़ने वाले…