
Surabhi kumari
मैं भी सरकारी स्कूल से पढ़ी हु वहाँ पर तो विशेषज्ञ टीचर तो थे है नहीं पर सबसे बड़ी बात वहां पर छात्रों के लिए शौचालय भी नहीं था । हमलोगो को खुले में जाना पड़ता था और स्थितियां एकदम प्रतिकूल होती थी तो क्लास भी मिस करना पड़ता था पर इसके लिए न हमलोगे ने सवाल उठाया और न पैरेंट्स के द्वारा सवाल उठाया जाता,बस इतना ही लोगों का स्कूल से मतलब था कि बच्चे की 75% उपस्थिति हो ताकि छात्रवृत्ति और पोशाक की सुविधा मिलती रहे।















