
पता नहीं , इस बारे में कुछ कह नहीं सकती। भीतर बेईमानी, डर स्वार्थ तो है। लेकिन किसी से इतना मतलब नहीं, कि कोई आदर्श है या किसी को इतना पसंद किया या समर्थन दिया। ऐसा कुछ नहीं और अब तो बिल्कुल ही नहीं, या कह दो कि अभी किसी ऐसे सच से सामना नहीं हुआ जिसमे दिखायी दे कि हाँ मैं भी ऐसा करती हूँ। बस आचार्य जी आदर्श है, बाक़ी किसी के लिए कोई उत्तेजना या कोई लहर नहीं उठती कि ये देखी कितने सही है, किसी की ज़िंदगी से प्रभावित होती हूँ, नहीं। हाँ बस जो लहर…
















