
मुझे भी समाज में कुछ लोग एक फौजी जो ज्यादा किसी से मतलब नहीं रखता,और शायद खतरनाक है या अलग ही मिजाज़ का है, इस तरह से देखते हैं। इसमें भी वे लोग कुछ अच्छाई ढूंढ़ लेते हैं। वो ये कि वे मेरी दिनचर्या को मेरे पुराने पेशे से जोड़ देते हैं, जिनसे उनको सुरक्षा महसूस होती है। जिससे उनको खुद से सवाल न पूछने का बहाना मिल जाता है। मेरे किसी सामाजिक उत्सव में या धार्मिक कर्मकांड में शामिल न होने को वे लोग अनुशासन या सादगी का नाम देकर बचना जानते हैं। मेरा अकेल…
















