
✍🏻 पोस्ट 26 | 25 सितंबर '26 💭 विषय — पर्यावरण और जलवायु ─────────── 🌡️ एल नीनो से 4.51 लाख जानों पर खतरा? 🌍 एक रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच मजबूत एल नीनो से जुड़ी अत्यधिक गर्मी दुनिया में सामान्य स्थिति की तुलना में लगभग 4.51 लाख अतिरिक्त मौतों से जुड़ सकती है। भारत में यह अनुमान लगभग 15,800 ± 1,600 अतिरिक्त गर्मी से जुड़ी मौतों का है। ये हो चुकी मौतें नहीं, बल्कि मॉडल का अनुमान हैं। 👉 एल नीनो कोई नई घटना नहीं है। यह प्रशांत महासागर में समुद्र और वायुमंडल के बीच होने वाला प्राकृतिक बदलाव है, जो दुनिया के तापमान और बारिश के ढर्रे को प्रभावित कर सकता है। लेकिन आज यह घटना एक ऐसी दुनिया में असर डाल रही है जो पहले से गर्म हो रही है। 📈 विश्व मौसम संगठन के अनुसार, 2025 में एशिया का औसत तापमान 1991–2020 के औसत से 0.96°C अधिक था। एशिया में अत्यधिक गर्मी, बाढ़, सूखा और ग्लेशियरों का पीछे हटना लाखों लोगों को प्रभावित कर रहा है। 🇮🇳 दक्षिण एशिया की संवेदनशीलता भी बड़ी है। भारत में साल की लगभग 80% बारिश जून से सितंबर के मानसून से आती है। बढ़ता तापमान दक्षिण एशिया में गर्मी, सूखे, बाढ़ और मानसून में बदलाव के जोखिम को बढ़ा सकता है। 🏔️ हिमालय और हिंदू-कुश क्षेत्र में ग्लेशियरों का पीछे हटना भी भविष्य के पानी और खेती पर असर डाल सकता है। यानी संकट केवल आज की गर्मी का नहीं, आने वाले वर्षों में पानी, भोजन और स्वास्थ्य का भी है। 🔮 आगे क्या होगा, इसकी हर बात निश्चित नहीं कही जा सकती। लेकिन इतना स्पष्ट है कि जलवायु जोखिम उन लोगों पर ज्यादा भारी पड़ते हैं जिनके पास सुरक्षित घर, पानी, स्वास्थ्य सेवाएँ और आर्थिक सुरक्षा कम है। 🪞 लेकिन यहाँ एक और सवाल शुरू होता है। हम संकट आने पर एल नीनो, गर्मी, सूखा और बाढ़ को देखते हैं। पर क्या हम यह भी देख रहे हैं कि हमारी जरूरत कहाँ खत्म होती है और “और चाहिए” कहाँ शुरू होता है? 🌱 अधिक सुविधा, अधिक उत्पादन और अधिक उपभोग को लगातार विकास मानते रहने पर प्रकृति पर दबाव बढ़ता है। इसलिए संकट से निपटना जरूरी है, लेकिन अपने उस “और” को देखना भी जरूरी है, जो जरूरत से आगे जाकर प्रकृति पर दबाव डालता है। ❓ सवाल सिर्फ यह नहीं है कि एल नीनो से कितने लोगों की जान जा सकती है। सवाल यह भी है कि हमारी जरूरतें कहाँ खत्म होती हैं और वह “और” कहाँ शुरू होता है, जिसके लिए हम प्रकृति पर लगातार दबाव बढ़ाते जाते हैं? 📌 स्रोत: https://www.hindustantimes.com/india-news/super-el-ni-o-may-cause-451-000-additional-global-deaths-15-800-in-india-study-101790136010990-amp.html















































