
भारत में सुपर अल नीनो (Super El Niño) की वर्तमान स्थिति अत्यंत सक्रिय बनी हुई है। प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ रही इस गर्मी का सीधा असर भारत के मौसम और प्राकृतिक तंत्र पर दिखने लगा है। वैज्ञानिक रिपोर्टों और आंकड़ों के अनुसार भारत में इसकी वर्तमान स्थिति इस प्रकार है। # 1. मानसून पर सीधा आघात (कमजोर बारिश) 15% बारिश की कमी : इस अल नीनो के कारण 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से काफी कमजोर रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल बारिश सामान्य से लगभग 15% कम दर्ज की गई है। * दक्षिणी और पूर्वी भारत में सूखा: देश के दक्षिणी प्रायद्वीपीय हिस्से में बारिश की कमी 29% तक पहुंच गई है। इसके कारण कई राज्यों में जलाशयों (Reservoirs) का जलस्तर पिछले वर्षों की तुलना में काफी नीचे चला गया है, जिससे सिंचाई और पीने के पानी का संकट गहराने लगा है। # 2. सर्दियों और आगामी महीनों में जानलेवा गर्मी का खतरा * सर्दियों पर असर (Warmer Winter) : विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार - यह अल नीनो फरवरी 2027 तक पूरी तीव्रता के साथ जारी रहेगा। इसके कारण भारत में इस बार (2026-27) सामान्य ठंड गायब रह सकती है और उत्तर व मध्य भारत में अत्यधिक गर्म सर्दियों का सामना करना पड़ सकता है। * अतिरिक्त मौतों की चेतावनी : शिकागो यूनिवर्सिटी के क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार- इस सुपर अल नीनो के कारण होने वाली भीषण गर्मी से सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच भारत में सामान्य वर्ष की तुलना में करीब 15,800 अतिरिक्त मौतें होने की आशंका जताई गई है। * # 3. पारिस्थितिकी (Ecosystem) और खेती पर भारी दबाव * 180+ वैज्ञानिकों की गंभीर चेतावनी : हाल ही में भारत के 180 से अधिक वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों ने चेतावनी जारी की है कि इस सुपर अल नीनो का असर सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं रहेगा। * इसका सबसे बुरा असर खेती (विशेषकर रबी/गेहूं की फसल की बुआई और पैदावार), मिट्टी की नमी में कमी, पश्चिमी घाट व हिमालयी क्षेत्रों के जंगलों में आग लगने के खतरों और समुद्री पारिस्थितिकी (कोरल ब्लीचिंग) पर पड़ रहा है । सुपर अल नीनो के कारण खाद्य पदार्थों की महंगाई (Food Inflation) में भारी उछाल आ रहा है, जिसका देश के गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर सीधा और बेहद गंभीर वित्तीय दबाव पड़ रहा है। वर्तमान में अगस्त-सितंबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में खाद्य महंगाई दर लगभग 5.95% तक पहुंच चुकी है। चूंकि अल नीनो की वजह से मानसून में 15% की कमी आई है, इसलिए दाल, चीनी, प्याज, सरसों तेल और मौसमी सब्जियों की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। गरीब और मध्यम वर्ग की आय का 60% से अधिक हिस्सा केवल भोजन पर खर्च हो रहा है। महंगाई बढ़ने से उनके पास अन्य बुनियादी जरूरतों के लिए पैसे नहीं बच रहे हैं। | सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और गरीब वर्ग पर हो रहा है।


















