
✍🏻 पोस्ट 19 | 6 अक्टूबर '26 💭 विषय — लोकधर्म ───────── 🐻 भालू के पित्त को "दवा" मानने की कीमत: पिंजरे में कैद हज़ारों भालू 🏺 एशिया के कुछ देशों में सदियों पुरानी मान्यता है कि भालू का पित्त (bile) बहुत ताकतवर दवा है। पारंपरिक चिकित्सा में इसे मिर्गी, दिल की बीमारी, सर्दी-ज़ुकाम, कैंसर और शराब के नशे जैसी बीमारियों के लिए इस्तेमाल किया जाता था। यह मान्यता सन 659 से लिखी हुई मिलती है। आज भी कई लोग मानते हैं कि "असली" भालू वाला पित्त ही सबसे असरदार है, और उसके लिए ऊँचे दाम देने को तैयार रहते हैं। 🤔 पर क्या कभी किसी ने पूछा कि यह पित्त आता कहाँ से है? ⛓️ इसके लिए भालुओं को "बाइल फ़ार्म" में पाला जाता है। छोटे, ताबूत जैसे लोहे के पिंजरे। अंधेरे कमरे। बचाए गए भालुओं के पंजों में मवाद, जगह जगह से झड़े बाल, और इतने बढ़े हुए नाख़ून कि वे उनके अपने मांस में धँस गए थे। पित्त निकालने का तरीका हर फ़ार्म में एक जैसा नहीं होता। कहीं पित्ताशय में सुई डाली जाती है, तो कहीं पेट में स्थायी नली बना दी जाती है। 📊 CNN की 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक अकेले चीन में करीब 15,000 भालू ऐसे फ़ार्मों में कैद हैं, और वहाँ इसका बाज़ार अब भी क़ानूनी है। वियतनाम में 2005 में 4,300 भालू फ़ार्मों में थे। भालू बचाने वाली संस्था Free the Bears के मुताबिक उनमें से 3,700 से ज़्यादा कैद में ही मर गए। 🔬 और सबसे बड़ी बात: पित्त का एक प्रमुख सक्रिय घटक (UDCA) अब लैब में बनाया जा सकता है। यानी इलाज के लिए किसी भालू को कैद करने की ज़रूरत ही नहीं। फिर भी बहुत से लोग "असली" वाला ही चाहते हैं। 😰 तो यह मान्यता छूटती क्यों नहीं? क्योंकि बीमारी के आगे इंसान डरा होता है, और डरा हुआ आदमी सच नहीं, सहारा ढूँढता है। और "असली", "दुर्लभ", "महँगा" शब्द उस सहारे को और पक्का कर देते हैं। 🪞 पर इस पूरी कहानी में एक जीव ग़ायब है: भालू। भालू भी दर्द और गंभीर शारीरिक पीड़ा से गुज़रता है, भले वह बता न सके। फिर भी हम उसे बस "कच्चे माल" की तरह देखते हैं। जब इंसान दुनिया को सिर्फ़ अपने काम की चीज़ों में बाँट देता है, तो सामने वाले की चीख़ उसे सुनाई देना बंद हो जाती है। और दिक़्क़त भालू में नहीं, देखने वाली उस नज़र में है जो हर चीज़ में बस यही पूछती है, "मेरे किस काम आएगा?" ❓ भालू के साथ जो कर रहे हैं, क्या वही प्रवृत्ति हम अपने आसपास की दुनिया के साथ भी अलग-अलग रूपों में नहीं दोहरा रहे? 📚 स्रोत: 1. CNN (2023): https://ktvz.com/news/national-world/cnn-world/2023/06/03/caged-and-cut-open-for-bile-the-fight-to-free-asias-farmed-bears/ 2. Free the Bears (2025): https://freethebears.org/blogs/news/bear-bile-farming-2025-status

















































