
भालू के साथ जो कर रहे हैं, क्या वही प्रवृत्ति हम अपने आसपास की दुनिया के साथ भी अलग-अलग रूपों में नहीं दोहरा रहे हैं? मैं बीते दिनों एक गुरुद्वारे में में गई थी जो एकजंगल के अंदर ही है और उस जंगल के अंदर एक तथाकथित गुरु महाराज रहता है जो यह कहता है जानवरों पर दया करो और खुद जानवरों को कैद कर के रखा है हर एक को पिंजरे में वहां मैंने देखा चार ऊंट थे जिनके घुटने पूरी तरह से छिले हुए थे, और ये कहते हैं जानवरों पर दया करो चिड़ियों का एक पिंजरा था जहां बहुत सारे रंग बिरंगी चिड़िया थी और वह कैद थी और ये कहते हैं जानवरों पर दया करो ये कैसी दया है? और मैंने सुना वहां कुछ लोग कह रहे थे कि यह चिड़ियों का जोड़ा₹500 में बिक रहे हैं इस जंगल के अंदर उसे तथाकथित गुरु ने गाय भैंसों का एक तबेला भी बनाया है जहां से दूध निकाला जाता है और फिर उसी दूध से गुरुद्वारे में लस्सी खीर मिलती है और यह कहते हैं जानवरों पर दया करो और मैंने वहां देखा एक मुर्गा और एक मुर्गी को भी कैद किया हुआ है, और हम लोग यही समझते हैं कि गुरु कितना महान है महान काम कर रहा है लोग वहां खूब दान देते हैं। आचार्य जी की शिक्षाओं ने ये दृष्टि दी है कि मैं वहां जाकेइतना कुछ देख पाई नहीं तो मैं भी यही समझती ये गुरु कितना महान है जो जानवरों पर दया करता है इनकी पीड़ा को समझता है ये कभी समझ नहीं आता कि ये तो शोषण हो रहा है।



















