
🪔 मेरा मंदिर है यह बोध हॉल, ये बोध सत्र! दर्शन के लिए मै,पत्नी, बच्चे, भाई मित्र सब एक साथ मेरे बच्चों के लिए इस मंदिर के अलावा कोई दूसरी जगह नहीं, जहाँ वे जीवन को सही मायने में समझना और सुरक्षित जीवन जीना सीख सकें। पत्नी के साथ प्रेम क्या है, रिश्ते में एक-दूसरे को समझना क्या है, यह सीखने के लिए इससे बेहतर जगह मेरे पास नहीं है। भाई के साथ संबंध कैसे हों, मित्रों और बंधु-बांधवों के साथ कैसा व्यवहार हो, जीवन के रिश्तों को कैसे जिया जाए—यह सब मुझे यही जगह सिखा सकती है। मेरे लिए यह सिर्फ एक हॉल नहीं, जीवन को सही दिशा देने वाला मंदिर है। यहाँ पूजा-पाठ नहीं, जीवन को समझने का काम होता है। यहाँ सिर झुकाना नहीं, अहंकार मिटाना सीखते हैं। मैं चाहता हूँ कि मेरा पूरा परिवार इस बोध की धारा से जुड़ा रहे, क्योंकि मैं उन्हें सिर्फ सुख-सुविधाएँ नहीं, एक सही जीवन देना चाहता हूँ। यही मेरा मंदिर है, यही मेरी साधना है





















