
बरेली से मुंबई: स्विमिंग के बहाने एक सीख आचार्य जी की शिक्षाओं से प्रेरित होकर मैं बरेली से मुंबई स्विमिंग सीखने आई हूँ। बरेली में मैंने स्विमिंग सीखी थी, लेकिन हाथों की movement, breathing और kicking जैसी कई चीज़ें गलत तरीके से सीख गईं। अब मुंबई में जब मेरे कोच मेरी गलतियाँ पकड़ते हैं और डाँटते हैं, तो मुझे बुरा नहीं लगता। बल्कि अच्छा लगता है, क्योंकि कोई मुझे मेरी कमी दिखा रहा है। आज कोच ने कहा, “याद रखिए, कब breathe करना है और कब साँस लेनी है।” तब मुझे लगा कि पुरानी गलतियाँ केवल समझ लेने से नहीं जातीं। जिस pattern को हमने वर्षों तक दोहराया है, शरीर और मन उसी को दोहराते हैं। सही जानते हुए भी हम फिर वही गलती कर बैठते हैं। शायद जीवन में भी ऐसा ही है। केवल सही बात जानना पर्याप्त नहीं है; उसे बार-बार अभ्यास में लाना पड़ता है। आचार्य जी से मैंने खेलों और क्लबों की महँगी व्यवस्था के बारे में सुना था। मुंबई आकर पहली बार उसे करीब से देखा, डेढ़ महीने की swimming fee लगभग ₹18,000 है और क्लब की membership लाखों में है। लेकिन इस पूरी यात्रा का एक और पहलू मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मेरी swimming, रहने और सीखने का खर्च मैं स्वयं उठाती हूँ। आचार्य जी की शिक्षाओं ने मुझे यह समझ दी है कि अपने जीवन की जिम्मेदारी किसी पिता, भाई या पुरुष मित्र पर डालकर नहीं, बल्कि स्वयं सक्षम बनकर उठानी चाहिए। मेरे अपने loans भी चल रहे हैं और मैं उन्हें समय पर चुकाती हूँ। फिर भी मैं अपने सीखने और अपने विकास पर खर्च करने में सक्षम हूँ। मेरे लिए यह सिर्फ़ swimming सीखना नहीं है। यह शरीर की पुरानी गलतियों को सुधारने के साथ-साथ जीवन में भी निर्भरता से स्वतंत्रता की ओर बढ़ने की यात्रा है। और शायद असली सीख यही है, गलती हो जाना समस्या नहीं है; गलती को पहचानकर भी उसे दोहराते रहना समस्या है।
















































