
नेहा जी आपकी जीवन की यह सीख बहुत गहरी है और आपने जो ये लाइन बोली अपने खर्चो के लिय आप अपने पिता या भाई पर निर्भर नहीं बल्कि खुद ही सारा खर्चा उठा रही है और अब नया कुछ सीखने के लिय भी समय ओर संसाधन खुद ही मैनेज करती है ये बहुत अच्छी बात है और आप बोहत अच्छा कर रही है । हमें आपसे बहुत कुछ सीखने को मिला ओर मुझे लगता है कि आप कर सकती है हम भी कर सकते है , लेकिन समय बहुत लग रहा है यही कारण है कि मैं बहुत सोचने लगती हु ओर मेरा समय भी बर्बाद हो जाता है और उसके बाद फिर खुद पर गुस्सा भी आता है जैसा आपने कहा शायद जीवन में भी ऐसा ही है। केवल सही बात जानना पर्याप्त नहीं है; उसे बार-बार अभ्यास में लाना पड़ता है। यही मै नहीं कर पा रही हु आचार्य जी को सुनती हु फिर भी बहुत सवाल आते है मन में इसी वजह से काम से मन हट जाता है । पर फिर भी प्रयाश जारी है।🙏


















