Neha Saxenaबरेली से मुंबई: स्विमिंग के बहाने एक सीख
आचार्य जी की शिक्षाओं से प्रेरित होकर मैं बरेली से मुंबई स्विमिंग सीखने आई हूँ।
बरेली में मै…
नेहा जी, कोच की एक लाइन ने जो खोल दिया वो सीधा निशाने पर है। बरसों पुराना pattern सिर्फ समझने से नहीं टूटता, शरीर अपनी पुरानी आदत पर लौट आता है, जानते हुए भी। यही बात अपने खर्च और loan वाले हिस्से पर भी उतनी ही सच है, शायद उससे भी ज़्यादा। वहाँ भी बरसों की conditioning रही होगी कि ज़िम्मेदारी किसी और के कंधे पर हो, और उसे पहचान लेना भर काफी नहीं, हर महीना खुद चुका कर उसे दोहराना पड़ता है, ठीक वैसे ही जैसे हाथों की movement को बार बार दुरुस्त करना पड़ता है। स्विमिंग में गलती पकड़ने वाला कोच बाहर बैठा है, लेकिन जीवन की इस तैराकी में कोच कौन है, यही देखते रहिएगा। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401



















