
29 जनवरी को लखनऊ के बी. आर. अम्बेडकर सभागार में आचार्य जी का विशेष सत्र शहर के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया। लंबे समय बाद हुए इस सार्वजनिक संवाद के लिए ऐसा उत्साह उमड़ा कि सभागार समय से पहले ही पूरी तरह भर गया- बैठने तक की जगह नहीं बची। वातावरण जिज्ञासा, ऊर्जा और गहरी ग्रहणशीलता से भरा हुआ था; यहाँ तक कि विशिष्ट अतिथि भी बिना संकोच ज़मीन पर बैठकर सत्र का हिस्सा बने। एक मार्मिक क्षण तब आया जब आचार्य जी के आग्रह पर एक छोटी बच्ची ने भजन प्रस्तुत किया, और पूरा सभागार भावविभोर हो उठा। सत्र के दौरान आचार्य जी ने कबीर साहब के भजन के माध्यम से गहन आध्यात्मिक संकेतों को सरलता से सामने रखा, जिससे लोगों को आत्मचिंतन की दिशा मिली। कार्यक्रम के बाद भी उत्साह कम नहीं हुआ- सैकड़ों लोग देर रात और ठंड के बावजूद लंबी कतारों में खड़े रहे, और आचार्य जी ने प्रत्येक व्यक्ति से मिलकर उनकी बात सुनी। अंत में जब पूरी भीड़ एक साथ संत कबीर के दोहे गुनगुनाने लगी, तो वह पल सबको एक सूत्र में बाँध गया और पूरे वातावरण में अपनापन उतर आया।




































