
Ankita Mishra
ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि सही मायने में मेरे सफर की शुरुआत यहीं से हुई साहेब जी 🙏🏻आंखों के सामने थे उस दिन मेरी तबीयत अचानक से ख़राब हो गई थी फिर भी सत्र तो लेना ही था और उस पल को मैंने फ्रीज भी किया उस दिन एहसास हुआ कि पा लेने की राह पर रोज भागते हुए हम भूल ही जाते हैं कि अपने खोये हुए हिस्से को बचा लेना ही असली पाना है सत्र हुआ बुक साइनिंग हुई पता भी नहीं चला रात निकल गई रात में 12 बजे लखनऊ से कानपुर के लिए ट्रेन लेना ऐसा था जैसे पूरी दुनिया खो कर घर लौट रही थी पर वो खोना भी खोना नहीं था 😍 उस दिन आचार्य जी ने खलक सब रैन का सपना भजन समझया था जिससे समझ आया जिंदगी को उतना ही पकड़ा जा सकता है जितना की एक मुट्ठी बंद कर के कोई हवा पकड़ पाता है 🍃♥️


















