
✍🏻 पोस्ट 1 | 1 अक्टूबर '26 💭 विषय — इंडियन करंट अफ़ेयर्स ────────── 💍क्या कम तलाक सच में मजबूत रिश्तों की निशानी हैं? 🏛️ हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक ऐसे दंपति को सुरक्षा दी, जिन्होंने आपसी सहमति से तलाक लेने के बाद दोबारा शादी कर ली थी। दोनों के दो बच्चे भी हैं। इसी मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि विवाह को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। ❓ लेकिन यहाँ एक और सवाल उठता है, क्या कम तलाक अपने-आप यह साबित करता है कि विवाह और परिवार अधिक मजबूत हैं? 🇮🇳 भारत में तलाक कम होने की बात अक्सर परिवार की मजबूती से जोड़कर देखी जाती है। दूसरी ओर, इंग्लैंड और वेल्स में 2025 में 1,05,002 तलाक दर्ज हुए और विपरीत-लिंगी विवाहित लोगों में तलाक की दर प्रति 1,000 पर 8.4 थी। लेकिन अलग-अलग देशों के आँकड़ों की सीधी तुलना सावधानी से करनी चाहिए परंतु विवाह का आधार निश्चित रूप से संदेह जनक है। 🔎 असल सवाल केवल यह नहीं कि कितने विवाह टूटे, बल्कि यह भी है कि जो विवाह टिके हैं, वे किस आधार पर टिके हैं। ⚠️ भारत में विवाह के भीतर हिंसा भी एक वास्तविक तथ्य है।राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार, 18–49 वर्ष की कभी विवाहित रही महिलाओं में लगभग 29% ने कभी न कभी पति द्वारा शारीरिक या यौन हिंसा का अनुभव बताया। ग्रामीण महिलाओं में यह लगभग 31% और शहरी महिलाओं में 25% था। 🏠 विवाह के भीतर असमानता केवल हिंसा तक सीमित नहीं है। समय उपयोग सर्वेक्षण 2024 के अनुसार, 15–59 वर्ष की महिलाओं में 83.1% सामान्य दिनों में घरेलू सेवाओं में भाग लेती थीं, जबकि पुरुषों में यह 26.4% था। 📚 2026 के एक अध्ययन ने 18–30 वर्ष की 514 अविवाहित भारतीय महिलाओं के बीच लैंगिक भेदभाव, विवाह संबंधी धारणाओं और निर्णय लेने की अनुभूत स्वतंत्रता का अध्ययन किया। इसमें लैंगिक भेदभाव का बेहतर जीवन-स्थिति से नकारात्मक संबंध, जबकि निर्णय की अनुभूत स्वतंत्रता और जागरूकता का सकारात्मक संबंध पाया गया। 📌 इसलिए कम तलाक का अर्थ यह नहीं कि हर विवाह सफल है। तलाक एक दिखाई देने वाला कानूनी आँकड़ा है; संबंध के भीतर चल रही पीड़ा, असमानता या दबाव केवल तलाक की संख्या से नहीं मापे जा सकते। 🪞 प्रश्न यह नहीं कि शादी बची या टूट गई। प्रश्न यह है कि विवाह किस आधार पर चल रहा है। _🤝 यदि दो लोग केवल समाज, बच्चों, आर्थिक निर्भरता, प्रतिष्ठा या भय के कारण साथ हैं, तो क्या उस निरंतरता को ही सफलता कहा जा सकता है? 🗣️ जहाँ समस्या हो, वहाँ पहले उसे समझने, संवाद करने और सुधारने का प्रयास होना चाहिए। लेकिन यदि सुधार संभव न हो, तो केवल “विवाह टूटना नहीं चाहिए” के विचार से लगातार पीड़ा को ढँकते रहना समाधान नहीं। 🌱 महिला की स्वतंत्रता का वास्तविक पैमाना केवल यह नहीं कि वह विवाहित है या तलाकशुदा। असली प्रश्न है, क्या वह बिना भय और दबाव के अपने जीवन, शिक्षा, काम, विवाह और संबंधों के बारे में निर्णय ले सकती है? 📚 स्रोत: TOI https://timesofindia.indiatimes.com/city/lucknow/marriage-should-notbe-taken-lightly-hc/articleshow/134573515.cms https://www.mospi.gov.in/uploads/publications_reports/publications_reports1780040415321_0624fb13-fb47-40bc-b470-7c7e9635c3ef_PLFS_2025_F_REV_29052026.pdf

















































