
निवेदिता कुमारी
भारत में 90% शादियां तो बस इसीलिए टिकी है कि अब बच्चों का भी तो सोचना है, मां बाप अलग हो गए तो बच्चों पर क्या असर पड़ेगा। अगर औरतों के पास अपनी स्वतंत्रता होती अपनी कमाई होती तो कब के इस पुरुष प्रधान मानसिकता वाले समाज को लात मार देती। अगर पति काम में व्यस्त है पत्नी और बच्चों के लिए समय नहीं है तो पत्नी मां और बाप दोनों की जिम्मेदारी निभाए, अगर पति बाहर से थक के आए तो पत्नी को ही ये जिम्मेदारी है कि वो पति से उसका हाल पूछे,पति अगर खुद अपना हाल बताने लगे तो ऐसा लगता है वो अपने आप में छोटा महसूस करने लगता है। हर बार भारतीय पतियों को परमेश्वर ही बनना होता है चाहे उसे ढंग से बात करने भी न आता हो। और भी बहुत कुछ..............


















