
महिला को सुरक्षा चाहिए।वरना घुटन वाले माहौल में रहने से कहीं बेहतर है अलग और स्वतंत्र रहना।पर इसके लिए आत्मनिर्भर होना और दुनिया क्या कहेगी की परवाह नहीं सोचने वाले ही समझ सकते हैं इसको।मैं इस दौर से गुज़र चुकी हूँ और 12-13 साल तक बहुत झेला कोर्ट तक गई लेकिन मेरे पति एकदम से सुधर गए फिर डाइवोर्स नहीं हो पाया।सबसे अधिक जरूरी स्त्री की शिक्षा और आत्मनिर्भर होना जरूरी है तभी वह इस चुनाव को लेकर आगे बढ़ सकती हैं।क्योंकि ज्यादे जगह स्त्री के घर के लोग साथ नहीं देते और वह कमाती नहीं है तो मार खाकर और गाली खाकर भी पड़ी रहती है रोना-धोना करके उसी जगह।केंद्र में शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता आती है।परिवार वाले शादी करा दी तो पल्ला झाड़ लेते हैं।पहले तो पढ़ाते नहीं और लड़की को भी शादी हो जाएगी बस यही पता रहता है कि पति कमाएगा और मैं मजे करूँगी।सामाजिक ढाँचा ही अजीब है। जो जिस लायक है वही करे।घर से बाहर निकलने के बाद जो धक्के खाने के बाद मजबूती आती है वो यदि निकलेगा ही नहीं तो क्या समझ आएगा।


















