
🌟 कोलंबिया के जलवायु सम्मेलन में जीवाश्म ईंधन से दूर जाने के लिए वित्तपोषण की कमी पर प्रकाश डाला गया। 🌍 जब कोई समस्या बार-बार लौटती है, तो एक बार यह भी पूछना ज़रूरी है क्या हम सच में जड़ देख रहे हैं, या सिर्फ वह देख रहे हैं जो देखना आसान है? 🌱 क्या हुआ सांता मार्टा में? अप्रैल 2026 में कोलंबिया के सांता मार्टा में 50 से अधिक देश जुटे कोयला, तेल और गैस से बाहर निकलने का रोडमैप बनाने के लिए: 🔅1,500 से अधिक नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए, साथ में 900 से अधिक संगठनों का 'People's Summit' भी चला 🔅IEA ने बताया कि ईरान युद्ध के कारण मार्च 2026 में वैश्विक तेल आपूर्ति में 1.01 करोड़ बैरल प्रतिदिन की कमी आई 🔅EU जलवायु आयुक्त Wopke Hoekstra ने स्वीकार किया कि दुनिया के तीन सबसे बड़े उत्सर्जक चीन, अमेरिका और भारत इस बातचीत में शामिल नहीं हैं 🔅सम्मेलन में जो सबसे बड़ी बाधा सामने आई वह थी जीवाश्म ईंधन से बाहर निकलने के लिए वित्त की कमी यह पहल UN की धीमी प्रक्रिया से थककर शुरू हुई। पर एक प्रश्न मन में उठता है दशकों की बैठकों, घोषणाओं और समझौतों के बाद भी हम वहीं क्यों खड़े हैं? क्या सच में पैसे की कमी ही एकमात्र कारण है? आचार्य जी समझाते हैं कि यह संकट वित्त का नहीं, उस अज्ञान का है जो प्रत्येक मनुष्य के भीतर बैठा है। जब तक कोई यह नहीं जानता कि वह कौन है और जीवन किस लिए है तब तक भीतर एक स्थायी बेचैनी बनी रहती है। यह बेचैनी इच्छा को जन्म देती है, और इच्छा उपभोग को। इच्छा जड़ नहीं है वह उस अज्ञान का लक्षण है। यही कारण है कि तकनीकी समाधान अधूरे रहते हैं। आचार्य जी अपने लेख में बताते हैं: "कामना का स्वभाव ही यही होता है वो यहाँ तक जाती थी, मौका मिलेगा तो वहाँ तक जाएगी।" चालीस साल पहले की गाड़ियाँ आज से कहीं ज़्यादा प्रदूषण फैलाती थीं फिर भी आज प्रदूषण ज़्यादा है। तकनीक बेहतर हुई, पर भीतर की दौड़ नहीं रुकी बल्कि और तेज़ हो गई।और यह दौड़ किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि गरीब के पास साधन कम हैं, इच्छा नहीं वह भी उसी दिशा में दौड़ रहा है, क्योंकि उसे यही सिखाया गया कि जीवन का अर्थ है और अधिक पाना। यह सोच किसने स्थापित की, यह प्रश्न हर किसी को अपने भीतर देखना होगा। ✨ सम्मेलन की आलोचना करना आसान है। पर क्या यह देखना संभव है कि वही ढाँचा "और चाहिए, अभी पूरा नहीं हुआ" हमारे अपने भीतर भी उसी तरह काम कर रहा है? जब तक यह प्रश्न भीतर की तरफ नहीं मुड़ता, बाहर के समझौते केवल अगले सम्मेलन की तैयारी बनकर रह जाएँगे। 🗞️ News Link: Colombia climate conference highlights lack of financing for shift from fossil fuels https://ground.news/article/colombia-climate-conference-highlights-lack-of-financing-for-shift-from-fossil-fuels 🗞️ BBC News https://www.bbc.com/news/articles/cx2rq92yv4vo ✒️ लेख:- जलवायु परिवर्तन: काम अमीरों का, सज़ा गरीबों को https://acharyaprashant.org/en/articles/gareebon-par-climate-change-ka-prabhaav-1_2a34b03 ✒️ लेख:-जलवायु संकट को कैसे रोकें? https://acharyaprashant.org/en/articles/jalwayu-sankat-ko-kaise-roke-1_3cd99a9

























