
नमस्कार आचार्य जी 🙏 और मेरी कम्युनिटी के सभी साथियों को भी हृदय से धन्यवाद। ❤️ आचार्य जी, लोकधर्म में जिस खेल को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, उसके पीछे की मेहनत, संघर्ष और समर्पण को देखने वाली संस्था हमारी PAF है। यह देखकर मन भर आया कि यहाँ खिलाड़ियों की मेहनत को भी समझा जाता है और सम्मान दिया जाता है। आचार्य जी, आपको अनंत प्रणाम! 🙏 आपने हम जैसे लोगों को, महिलाओं को इतना प्रेम और सम्मान दिया है कि कभी-कभी विश्वास ही नहीं होता कि यह सब सच में हो रहा है या मैं कोई सपना देख रही हूँ। आपने कल कहा था, “पहले खुद को देखो, फिर मुझ पर भरोसा करना।” अपने आत्मावलोकन से आज मुझे समझ आ रहा है कि अपने जीवन और अपने चुनावों के प्रति मैं स्वयं ज़िम्मेदार हूँ। आज मैं आँखें खोलकर, पूरे विश्वास के साथ कह रही हूँ कि आपकी शिक्षाओं में मुझे जीवंत गीता और उपनिषदों का बोध दिखाई देता है। आपकी बातों पर चलना या न चलना हर इंसान की अपनी पसंद है, लेकिन इतनी भीड़ में आपको पहचानकर आपके साथ चलने की हिम्मत जुटा पाई, यही मेरे लिए आज बहुत बड़ी बात है। PAF में ऐसे लोग हैं, जिनमें मैंने स्वयं आपके बोध की झलक देखी है। यह मेरा अपना अनुभव है। रोहित सर, तरुण जी और स्नेहा जी 🙏 आप सभी का धन्यवाद करने के लिए मेरे पास शब्द कम पड़ रहे हैं। आप सभी से मैं सीख रही हूँ कि काम करने के लिए समय का बहाना नहीं, बल्कि समर्पण चाहिए। दिन हो या रात, घड़ी देखने से ज़्यादा ज़रूरी है कि जो काम करना है, उसे पूरी निष्ठा से किया जाए। आचार्य जी 🙏 कल आपने कहा, “मैं आपका भाई हूँ।” आपकी यह बात मेरे दिल को छू गई। एक महिला के रूप में मेरे लिए यह बहुत मायने रखता है कि कोई हमें केवल बेटी, बहन, पत्नी या बहू की भूमिका में नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र इंसान के रूप में भी देखता है। आचार्य जी, आपने मुझे यह महसूस कराया कि हर महिला को अपने जीवन को समझने, अपने निर्णय लेने और अपनी तरह से जीने का अधिकार है। आपके प्रति कोटि-कोटि प्रणाम। 🙏❤️















































